आठ महीने बाद चीन का कबूलनामा

पिछले साल पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प में मारे गए चीनी सैनिकों की संख्या को बताने में चीन ने आठ महीने लगा दिए. चीन की शी जिनपिंग सरकार शुरूआत में तो इसे झुठलाती रही पर चालबाज चीन आखिर कब तक दुनिया से सच्चाई छिपाता.

चीन का ये स्वीकारना की उसके सैनिक पिछले साल हुए गलवन घाटी में मारे गए थे, कई बातों की और इशारा भी करता है. चीन ने ये कबूलनामा ऐसे समय में किया है जब LAC पर सैन्य टकराव को घटाने और तनाव कम करने की दिशा की और बढ़ रही है. चीन ने सिर्फ गलवान घाटी में हुए झड़प में मात्र अपने तीन सैनिकों के मारे जाने की बात कबूली है, पर सच्चाई को अभी भी चीन छुपा रहा है.

आकड़ा इससे बड़ा है पर चीन शायद इसे दुनिया को बताना नहीं चाहता. चीन गलवान घाटी में हुए भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में अपने सैनिकों की संख्या को अभी भी छुपा रहा है. दरअसल, चीन की शुरूआत से ही ये नीति रही है कि वो अपने सैन्य नुकसान को नहीं बताता.

चीन ने आठ महीने का समय इस बात को उजागर करने में क्यों लिया ये चीन ही जाने, पर चीन के आठ महीने के कबूलनामे के बात ये बात तो स्पष्ट हो गई कि चीन सच्चाई को कितना भी छुपा ले सच्चाई छुपती नहीं. 

चीन ने गलवान घाटी में हुए भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में अपने एक रैजिमेंच कमांडर स्तर के एक अधिकारी के भी मारे जाने की पुष्टि की है.

गौरतलब है कि गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प में भारतीय सेना के कर्नल संतोष बाबू समेत 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और इस दौरान भारतीय सेना ने चीनी सैना के घुसपैठ की कोशिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया था.   

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