सावधान!! चिकन खाने से बढ़ता है ब्लैक फंगस का खतरा…जानिए वायरल दावे का सच

यूं तो सोशल मीडिया पर हमेशा ही कुछ ना कुछ वायरल होता ही रहता है जो आम जनता को भ्रम की ओर ले जाता है। ऐसा ही एक और वायरल दावा इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किया जा रहा है। जिसमें कथित तौर पर एनडीटीवी नेशनल चैनल का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है। जिस पर दावा किया जा रहा है कि फार्म चिकन खाने से ब्लैक फंगस फैल रहा है और पंजाब में सरकार ने पोल्ट्री फॉर्म्स को संक्रमित एरिया घोषित कर दिया है।

क्या है वायरल हो रहा दावा
सईद समी (Sayed Samee) नाम के एक फेसबुक यूजर ने 25 मई 2021 को कथित तौर पर एनडीटीवी की एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। जिसमें लिखा गया है कि, पंजाब सरकार ने पोल्ट्री फॉर्म को संक्रमित एरिया घोषित कर दिया है। इसके साथ स्क्रीनशॉट पर अलग से लिखा है कि ब्लैक फंगस फार्म चिकन की वजह से फैल रहा है और अपील भी की गई है कि कुछ दिनों तक फार्म चिकन न खाएं जाएं।

जानिए ब्लैक फंगस क्या है और यह कैसे फैलता है
 अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, ‘म्यूकोरमायकोसिस (जिसे पहले जाइगोमाइकोसिस कहा जाता था) एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है जो म्यूकोरमायसेट्स नामक मोल्ड के समूह के कारण होता है।’ यहीं बताया गया है कि म्यूकोरमायकोसिस संक्रामक बीमारी नहीं है और यह लोगों के बीच या लोगों और जानवरों के बीच नहीं फैल सकता है। 

वायरल हो रहे दावे की सच्चाई

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्लैक फंगस संक्रामक बीमारी नहीं है और ये इंसानों या जानवरों के संपर्क से नहीं फैलता। पंजाब सरकार ने ब्लैक फंगस और पोल्ट्री फॉर्म को लेकर ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। चिकन खाने से ब्लैक फंगस होने का दावा झूठा है।

जानिए एक्सपर्ट की राय
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर ऑफ सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ के चेयरपर्सन डॉ. राजीव दासगुप्ता ने बताया, ‘म्यूकोर-माइकोसिस को ही ब्लैक फंगस कहा जाता है, जो दुर्लभ है लेकिन गंभीर प्रकार का फंगल संक्रमण है। ये आपकी त्वचा, सिर, गर्दन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रेक्ट और फेफड़ों को प्रभावित करता है। मैं यहां इस बात का ख़ासतौर पर ज़िक्र करना चाहूंगा कि ब्लैक फंगस एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता लेकिन ये अस्पताल से होने वाले संक्रमण की तरह AC और लिफ्ट के ज़रिए फैल सकता है।’ 

नई दिल्‍ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (एम्‍स) के निदेशक डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि ब्‍लैक फंगस एक फंगल इन्फेक्शन है जो कि किसी संक्रमित मरीज के संपर्क में आने से नहीं फैलता है। उनके मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजहों में से एक मरीज की प्रतिरोधक क्षमता का कम होना है। ऐसे लोगों को और वो भी कोरोना से संक्रमित मरीजों को ये बीमारी होने की आशंका होती है। 

बिहार वेटरनरी कॉलेज के डीन और साइंटिस्ट डॉक्टर जेके प्रसाद ने बताया कि ऐसा कोई लिटरेचर या वैज्ञानिक साक्ष्य अबतक नहीं मिला है, जो इस बात की पुष्टि करे कि फार्म चिकन खाने से ब्लैक फंगस होता है। उन्होंने बताया कि भारतीयों में आम तौर पर चिकन को अच्छे से पकाकर खाने की आदत है। अच्छे तरीके से पका हुआ चिकन पूरी तरह सुरक्षित है।

क्या पंजाब सरकार ने ब्लैक फंगस और फार्म चिकन को लेकर कोई आदेश जारी किया है?

हमें ऐसी कोई प्रामाणिक रिपोर्ट नहीं मिली, जो इस वायरल दावे की पुष्टि करती हो कि ब्लैक फंगस के लिए पंजाब में चिकन फार्म को भी संक्रमित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। एनडीटीवी की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट 8 मई 2021 को प्रकाशित की गई है। जिसमे लुधियाना में पोल्ट्री फार्म को संक्रमित क्षेत्र घोषित करने का जिक्र है। हालांकि, इसके पीछे की वजह ब्लैक फंगस नहीं, बल्कि बर्ड फ्लू है। रिपोर्ट के मुताबिक, लुधियाना के एक पोल्ट्री फार्म के सैंपल बर्ड फ्लू के टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद फैसला हुआ। लुधियाना की इसी खबर के स्क्रीनशॉट को मॉर्फ़्ड कर ब्लैक फंगस से जोड़ वायरल किया जा रहा है।

निष्कर्ष: ब्लैक फंगस और चिकन को लेकर वायरल किया जा रहा दावा गलत साबित हुआ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्लैक फंगस संक्रामक बीमारी नहीं है और ये इंसानों या जानवरो के संपर्क से नहीं फैलता। पंजाब सरकार ने ब्लैक फंगस और पोल्ट्री फॉर्म को लेकर ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। चिकन खाने से ब्लैक फंगस होने का दावा झूठा है।

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