बसपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान, बोले – देश के विभाजन के लिए जिन्ना नही आरएसएस जिम्मेदार

उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी विपक्षी समाजवादी पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने एक बेहद बड़ा विवादित बयान दे डाला है। उन्होंने कहा है की सन 1947 में देश के विभाजन के लिए मोहम्मद अली जिन्ना नही बल्कि आरएसएस जिम्मेदार है। उन्होने कहा है की, देश को आजादी दिलाने में मोहम्मद अली जिन्ना का भी बड़ा योगदान है और वह भी देश के लिए अंग्रेजो से लड़े थे।

ओमप्रकाश राजभर ने वाराणसी में एक समाचार चैनल ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत के दौरान आगे कहा कि, यदि जिन्ना को आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया होता तो कोई बंटवारा नहीं होता। उस स्थिति में भारत बड़ा देश होता तथा तमाम तरह की समस्या भी उत्पन्न नहीं होतीं। बता दें राजभर की पार्टी भारतीय समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सपा के साथ गठबंधन किया है।

उन्होंने आगे कहा, “भारत के बंटवारे के दोषी जिन्ना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। विवाद की स्थिति संघ ने ही पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और गोविंद बल्लभ पंत सरीखे नेता जिन्ना की प्रशंसा करते रहे हैं। देश को आजादी दिलाने में जिन्ना का भी योगदान है, वह देश के लिए लड़े थे। आजादी मिलने के बाद जिन्ना को प्रधानमंत्री बना देना चाहिए था।”

दरअसल, अखिलेश यादव ने एक सभा में जिन्ना को लेकर बयान दिया था। इसे लेकर काफी विवाद हुआ था। इस बारे में जब ओम प्रकाश राजभर से पूछा गया तो वह भड़क गए। उन्होंने कहा, “जिन्ना के अलावा आप लोग महंगाई का सवाल क्यों नहीं पूछते। यह सारा कुछ भारतीय जनता पार्टी की वजह से हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी से हिंदू मुसलमान और भारत-पाकिस्तान हटा दीजिए तो उनकी जुबान बंद हो जाती है।”

उन्होंने आगे कहा, अगर जिन्ना को देश का पहला प्रधानमंत्री बना दिया होता, तो देश का बंटवारा न हुआ होता। उन्होंने कहा, “जिन्ना को देश का प्रधानमंत्री बनाने को लेकर आडवाणी जी के विचार पढ़िए, अटल जी के विचार को पढ़िए, जो देश के शुभचिंतक है उनके विचारों को पढ़िए। वह उनकी तारीफ क्यों करते हैं?” बता दें की पिछले दिनों 31 अक्टूबर 2021 को अखिलेश यादव ने आरएसएस पर एक बेहद विवादित बयान दिया था। 

अखिलेश यादव ने कहा था की, “सरदार पटेल जी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, जिन्ना एक ही संस्था में पढ़कर के बैरिस्टर बनकर आये थे। एक ही जगह पर पढ़ाई-लिखाई की उन्होंने, वो बैरिस्टर बने। उन्होंने आज़ादी दिलाई। सरदार पटेल ज़मीन पहचानते थे, ज़मीन को पकड़ कर के फैसले लेते थे। वो ज़मीन को समझ लेते थे तभी फैसले लेते थे। इसलिए उन्होंने आरएसएस जैसी विचारधारा के ऊपर पाबंदी लगा दी थी।”

इस बयान के बाद सपा प्रमुख अखिलेश सिंह यादव भाजपा के निशाने पर आ गए थे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अखिलेश यादव को आतंकवादियों का मददगार तक बता दिया था। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बयान को ‘शर्मनाक’ और ‘तालिबानी मानसिकता’ वाला बताया था। इसके साथ ही सीएम योगी ने अखिलेश से माफी मांगने की बात भी कही थी।

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