भारत में ही नही अफ्रीका, जर्मनी में भी होता है काला जादू… जाने किस तरह होता है काला जादू

हिंदुस्तान के कोने कोने में अगर आप कभी जाओगे तो आपको काला जादू, टोना-टोटका ही नजर आएगा। हर किसी के लिए इन शब्दों का अपना अलग अलग अर्थ होता है। कुछ लोगो के लिए भूत भागने का उपाय होता हैं तो कुछ लोग इसे अपनी तरक्की या अपनी वृद्धि का जरिया मानते हैं। जो लोन इन पर विश्वास करते हैं, वो इससे काफी ज्यादा डरते भी हैं। इसकी वजह से है कई बार हत्या जैसी घटनाएं होने की खबर भी आती है।

भारत के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में इसका इस्तेमाल किया जाता है और यह समस्याओं में से एक है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ भारत में ही होता है, बल्कि अन्य देशों में भी इसका काफी प्रभाव है। भारत के अलावा भी कुछ देश ऐसे है जहां काला जादू को तरक्की में अहम माना जाता है। तो चलिए जानते हैं कि काला जादू होता क्या है और भारत के अलावा किन-किन देशों में इसका प्रभाव है और वहां किस तरह से लोग काला जादू आदि का इस्तेमाल करते हैं।

जानिए क्या है काला जादू
जानकारों का मानना है ये जादू और कुछ नहीं बस एक बंच ऑफ एनर्जी है। जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है या कहें एक इंसान के द्वारा दूसरे इंसान पर भेजा जाता है। इसे लॉ ऑफ़ कंज़र्वेशन ऑफ़ एनर्जी से समझा जा सकता है। हिंदी में कहा जाए तो ऊर्जा को न ही पैदा किया जा सकता है और न ही इसे खत्म किया जा सकता है। सिर्फ इसके स्वरूप को दूसरे स्वरूप मे बदला जा सकता है।

यदि ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल है, तो नकारात्मक इस्तेमाल भी है। सनातन धर्म का अथर्ववेद सिर्फ सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के लिए ऊर्जाओं के इस्तेमाल को ही समर्पित है। आपको यह समझना होगा कि ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न तो दैवीय होती है, न शैतानी। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं – देवता या शैतान। 

गीता के अनुसार…
अर्जुन ने भी कृष्ण से यही सवाल पूछा था कि आपका यह कहना है कि हर चीज एक ही ऊर्जा से बनी है और हर एक चीज दैवीय है, अगर वही देवत्व दुर्योधन में भी है, तो वह ऐसे काम क्यों कर रहा है? कृष्ण ने जवाब दिया, ‘ईश्वर निर्गुण है, दिव्यता निर्गुण है। उसका अपना कोई गुण नहीं है।’ इसका अर्थ है कि वह बस विशुद्ध ऊर्जा है। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं। जो बाघ आपको खाने आता है, उसमें भी वही ऊर्जा है और कोई देवता, जो आकर आपको बचा सकता है, उसमें भी वही ऊर्जा है। बस वे अलग-अलग तरीकों से काम कर रहे हैं।

हर किसी का अलग अलग मानना है और अपनी अपनी परिभाषा है। कोई इसे ऊर्जा से जोड़ता है तो कई मनोविज्ञान से। लेकिन, अगर सीधे शब्दों में कहें तो यह तंत्र के अधीन आता है, जिसमें आप किसी दूसरे चीज की मदद लेकर या कुछ बदलाव करके कुछ पाने का प्रयत्न करते हैं, जबकि मंत्र में आप खुद में परिवर्तन करके ऐसा करते हैं। इसमें कई नकारात्मक सामानों का इस्तेमाल करके नकारात्मक ऊर्जा का विस्तार करने की कोशिश की जाती है और अपना हित साधने की कोशिश की जाती है, जो वैज्ञानिक दृष्टि से बिल्कुल सही नहीं है। 

कई बाबा आदि इसमें बाल, खोपड़ी, हड्डी, कंकाल, कपड़े, पक्षी, सांप, गुडिया आदि का इस्तेमाल करते हैं और कई बार काले जादू में डूबे व्यक्ति हत्या करने को भी उतारु हो जाते हैं। तंत्र विज्ञान के अनुसार, यह एक बहुत ही दुर्लभ प्रक्रिया है जिसे बहुत ही विशेष परिस्थितियों में अंजाम दिया जाता है। इसे करने के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। कुछ ही लोग इसे करने में सक्षम होते हैं।

इस प्रक्रिया में गुड़िया जैसी मूर्ति का इस्तेमाल होगा है। यह गुड़िया कई तरह की खाने की चीजों जैसे बेसन, उड़द के आटे आदि से बनाया जाता है। इसमें विशेष मंत्रों से जान डाली जाती है। उसके बाद जिस व्यक्ति पर जादू करना होता है उसका नाम लेकर पुतले को जागृत किया जाता है।

भारत में असम और पश्चिम बंगाल में इसका ज्यादा प्रभाव है और कई स्थानों पर इससे जुड़ी एक्टिविटी की जाती है। कहा जाता है कि इसके जरिए सिर्फ आप अपने ऊपर ही ये उपाय नहीं करते हैं, बल्कि दूसरे व्यक्ति को भी इसमें शामिल करते हैं और उस पर कोई गलत प्रभाव डालने की कोशिश की जाती है।

इन देशों में है काला जादू
भारत, अफ्रीकी देश, जर्मनी के अलावा चिली, फिलीपीन्स, यूके, मैक्सिको, रोमानिया में भी इसका असर काफी ज्यादा है। यहां तक कि पाकिस्तान भी काला जादू से जुड़ी कई घटनाओं की खबर आती रहती हैं।

अफ्रीका में काला जादू
27 से ज्यादा अफ्रीकी देशों में इसका प्रभाव है और तनजानिया में सबसे ज्यादा इसमें लोग लगे हुए हैं। अफ्रीका में इस तरह के जादू को मुति किलिंग, जूजू, वूडु आदि नामों से जाना जाता है। इनकी क्रियाओं में जानवर के शरीर के हिस्से, इंसानी शरीर के हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है। इस जादू से पूर्वजों की आत्मा किसी शरीर में बुलाकर भी अपना काम करवा सकते हैं। 

इसके अलावा दूर बैठे इंसान के रोग व परेशानी के इलाज के लिए पुतले का भी उपयोग किया जाता है। वूडू जानने वालों का मानना है कि इस धरती पर मौजूद हर जीव शक्ति से परिपूर्ण है। इसलिए उनकी ऊर्जा का उपयोग करके बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। वूडू में जानवरो जैसे की बंदर, मगरमच्छ, बकरी, ऊंट, लंगूर, छिपकली, तेंदुए आदि के अंग उपयोग में लाए जाते हैं।

जर्मनी में भी करते हैं काला जादू
जर्मनी में भी काला जादू का काफी इस्तेमाल होता है। यहां लोग निरंतर रूप से यहां जाते हैं और काला जादू से जुड़ी क्रियाएं करते हैं और इसके लिए अलग अलग पॉइंट्स बने हुए हैं। कई महिलाएं भी इसमें शामिल हैं, जो इसे अपने पेशा मानती हैं और इससे जरिए लोगों की मदद का दावा भी करती हैं।

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