ममता बनर्जी पर बरसे भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, कहा – तलवार के दम पर ममता भाजपा नेताओं को टीएमसी में शामिल कर रही है

मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमुल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा की,जिस तरह से तलवार के दम पर इस्लाम ने देश में प्रवेश किया था। उसी तर्ज पर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं को TMC में शामिल करा रही हैं। ममता बनर्जी देश के उन नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो गई हैं, जिनको प्रजातंत्र पर विश्वास नहीं है। 

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि बंगाल में एक-एक व्यक्ति पर 40-40, 50-50 केस लगा दिए गए हैं। उन्होंने इस मामले में भाजपा सांसद अर्जुन सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि अर्जुन सिंह पर 120 केस लगा दिए गए हैं। इसमें हत्या से लेकर डकैती और भ्रष्टाचार समेत तमाम तरह के केस शामिल हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि उनके ऊपर भी 20 केस लगाए गए हैं। वहीं हमारे प्रचारक महोदय को भी नहीं बख्शा गया है।

कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में इस तरह से विपक्ष को किल कर दिया जा रहा है कि कोई क्या जिएगा। विजयवर्गीय ने कहा कि, ” ममता बनर्जी के कुछ भी कहने से फर्क नहीं पड़ता। वह खुद पहले कांग्रेस में रहीं, युवक कांग्रेस की पदाधिकारी रही हैं। कांग्रेस के चरित्र का उन्हें प्रमाणपत्र देने का अधिकार है या नहीं, मुझे नहीं मालूम। दुनियाभर में भारत के लोकतंत्र की प्रशंसा हो रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं है।”

कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान के बाद उनका चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। इसी के साथ ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के अध्यक्ष काजी सैयद अनस अली नदवी ने कहा है कि, ” सियासत के लिए किसी धर्म को बदनाम करना उचित नहीं है। हिंदुस्तान में इस्लाम के प्रसार को मुहब्बत-भाईचारे की तहरीर करार दिया गया है। ये प्रक्रिया न सियासत की नैतिकता में शामिल है और न ही धर्म की सांस्कृतिक शिक्षा इसका हुक्म देती है।”

वहीं, जमीयत उलेमा हिंद मध्यप्रदेश के हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि कि कुछ सियासी लोग खुद को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए भूल गए हैं कि वे जो कह रहे हैं, वह उनकी खुद की पार्टी की गाइडलाइन के खिलाफ है। उधर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा है कि पहले वह अपनी पार्टी पर नजर डालें। कैलाश मजहब-ए-इस्लाम का इतिहास पढ़ लें, समझ लें, फिर कोई बात कहें। इस्लाम धर्म किसी से बैर, विद्वेष या नफरत का पाठ नहीं पढ़ाता।

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