मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी कश्मीर में घटा घटनाओं का ग्राफ, सुरक्षाबलों के जवानों पर हमले की घटनाएं भी घटी

मोदी सरकार के सख्त रवैये और सुरक्षाबलों की गहन निगरानी से कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी करने वालों के हौसले पस्त हुए हैं। ऐसे में सुरक्षाबलों पर पथराव की घटनाओं में बड़ी कमी हुई है। गृह मंत्रालय के मुताबिक साल 2019 में जनवरी से जुलाई के बीच पत्थरबाजी की 618 घटनाएं हुई थीं। पिछले साल इसी अवधि में 222 और इस साल जनवरी से जुलाई तक ऐसी 76 घटनाएं ही हुईं।

इस तरह पत्थरबाजी में सुरक्षाबलों के जवानों के चोट लगने की घटनाएं 2019 में 64 और इस साल अब तक सिर्फ 10 ही हैं। बता दें बीते दिनों ही जम्मू-कश्मीर पुलिस की सीआईडी ने आदेश जारी किया है कि पत्थरबाजों का किसी सरकारी योजना के लिए पुलिस वेरिफिकेशन नहीं किया जाएगा। जिसके बाद साल 2019 के बाद से पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी आई है।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो 2019 मे जनवरी से जुलाई के बीच जो पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, उसके मुकाबले इस साल इनमें 88 फीसदी की कमी आई है। जबकि, घायल होने वालों का प्रतिशत भी 93 से घटकर 84 हो गया है। इसकी बड़ी वजह आतंकियों के खिलाफ जबरदस्त अभियान, बड़ी तादाद में सुरक्षाबलों की कमी और कोरोना प्रतिबंध माने जा रहे हैं।

केंद्र सरकार के मुताबिक पैलट गन के इस्तेमाल और लाठीचार्ज में घायल होने वाले आम नागरिकों की संख्या भी कम हुई है। 2019 में 339 लोग घायल हुए थे। इस साल अब तक यह संख्या सिर्फ 25 लोगों की है। वहीं, आतंकियों की गिरफ्तारी की संख्या भी बढ़ी है। साल 2019 में जनवरी से जुलाई के बीच 82 आतंकवादी गिरफ्तार हुए थे। वहीं, इस साल जनवरी से जुलाई तक 178 दहशतगर्द धरे जा चुके हैं।

गौरतलब हो की 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-ए को पूरी तरह खत्म कर दिया था। जिसके बाद इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटते हुए 72 दिन तक इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी थी।

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