पीठ दर्द में योग से होगा लाभ

नवनीत कुमार गुप्ता: सदियों से योग और ध्यान के स्वास्थ्य पर प्रभाव पर चर्चा होती आयी है। भारतीय प्राचीन ग्रंथों
में योग को पांच हजार से अधिक प्राचीन पद्धति बताया गया है। भारतीय मनीषियों ने योग को जीवन जीने की कला बताया है। योग को तन और मन दोनों को स्वस्थ्य रखना वाला बताया गया है।
आधुनिक युग में योग को विज्ञान की कसौटी पर परखा जा रहा है। जिसमें योग खरा भी उतर रहा है। योग के प्रभाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2015 से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस वर्ष कल्याण के लिए योग विषय के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2021 की केंद्रीय थीम ‘योग के साथ रहें, घर पर रहें’ है।

हाल ही में, योग पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के विशेष कार्यक्रम साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ योग एंड मेडिटेशन (सत्यम) द्वारा समर्थित एक शोध को ‘जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस एंड क्लिनिकल रिसर्च’ में प्रकाशित हुआ है।
इस शोध पत्र में बताया गया है कि योग से पीठ के निचले हिस्से में पुराने दर्द से पीड़ित रोगियों को दर्द से राहत मिलती है, उनमें दर्द सहने की क्षमता बढ़ती है और उनके शरीर के लचीलेपन में सुधार होता है। अब तक के अधिकांश योग-आधारित अध्ययन किसी बीमारी से ठीक होने और जीवन की बेहतर गुणवत्ता के संकेतको क के रूप में रोगी के अनुभव और दर्द एवं अक्षमता की रेटिंग पर निर्भर रहे हैं। यह शोध पीठ के निचले हिस्से में पुराने दर्द (सीएलबीपी) पर योग के प्रभाव को मापने पर किया गया है। यह शोध कार्य नई दिल्ली स्थित एम्स के फिजियोलॉजी विभाग में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रेणु भाटिया ने डॉ. राज कुमार यादव (प्रोफेसर, फिजियोलॉजी विभाग, एम्स, नई दिल्ली) और डॉ. श्री कुमार वी (एसोसिएट प्रोफेसर, फिजिकल मेडिसीन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग, एम्स, नई दिल्ली) ने किया है।

यह अध्ययन पीठ के निचले हिस्से में पुराने दर्द (सीएलबीपी) से पीड़ित 50 साल की आयु वाले उन 100 रोगियों पर किया गया, जो पिछले 3 साल से पीठ की समस्या से परेशान था। कुल सप्ताह के व्यवस्थित योगिक हस्तक्षेप के बाद, मात्रात्मक संवेदी परीक्षण (क्यूएसटी) ने ठंड के दर्द और ठंड के दर्द को सहन करने की सीमा में वृद्धि दर्शायी। इन रोगियों में कॉर्टिकोमोटर संबंधी उत्तेजना और लचीलेपन में काफी सुधार देखा गया।

शोधकर्ताओं की टीम ने नई दिल्ली स्थित एम्स के दर्द अनुसंधान और टीएमएस प्रयोगशाला में सीएलबीपी रोगियों और फाइब्रोमायल्जिया रोगियों के लिए योग संबंधी एक प्रोटोकॉल भी विकसित किया है।

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