परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष मंत्री डॉ जितेंद्र ने प्रौद्योगिकी का बताया महत्व, कहा- कोविड के बाद भविष्य की अर्थव्यवस्था प्रौद्योगिकी पर निर्भर

नई दिल्ली, 14 सितंबर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी): केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि कोविड के बाद, भविष्य की अर्थव्यवस्था प्रौद्योगिकी पर बहुत अधिक निर्भर होने वाली है।

भारत के प्रमुख उद्योग घरानों के प्रतिनिधियों, जो सीएसआईआर सोसाइटी के सदस्य हैं, की एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी मॉडल अब एक विकल्प नहीं बल्कि आज एक आवश्यकता है। इसलिए अब सीएसआईआर और उद्योग को सर्वोत्तम और लागत प्रभावी परिणामों के लिए समान स्तर पर सहयोग करना चाहिए।

इस बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के विजय राघवन, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसन्धान विभाग (डीएसआईआर) के सचिव तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर ) के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मंडे, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के मुख्य महाप्रबंधक (सीएमडी) डॉ. नलिन सिंघल, भारतीय गैस प्राधिकरण (गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया – जीएआईएल) के मुख्य महाप्रबंधक डॉ.

मनोज जैन, राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) के मुख्य महाप्रबंधक श्री गुरदीप सिंह, भारत फोर्ज लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक बाबा कल्याणी, इंटेल इंडिया लिमिटेड की कंट्री हेड निवृत्ति रॉय तथा देशभर से वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया|

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन (ग्रीन हाइड्रोजन), कोयले से मेथनॉल (कोल टू मेथनॉल) तकनीक, स्मार्ट मोबिलिटी, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) के क्षेत्रों में इस वर्ष 15 अगस्त से चल रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव” के साथ- साथ 75 सर्वश्रेष्ठ स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने और उनकी सहायता करने का पता लगाना चाहिए । 

पिछले 7 वर्षों में भारत द्वारा की गई प्रगति पर टिप्पणी करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार ने वैज्ञानिक प्रतिबंधों को हटा दिया है और निजी खिलाड़ियों तथा स्टार्ट-अप के लिए क्षेत्र खोल दिया है। उन्होंने कहा कि इससे पिछले वर्षों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी देश में संसाधनों की कमी के कारण विकसित नहीं हो पाई, लेकिन अब यह हो रहा है और भारत एक अग्रणी वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निजीकरण को संभव बनाया गया है।

मंत्री महोदय ने कहा कि पुराने तरीकों से आराम से काम करने का युग बीत चुका हैI उन्होंने सीएसआईआर को जमीन पर स्पष्ट दिखाई देने वाले प्रभाव के लिए उद्योगों के सहयोग से विषय (थीम) आधारित परियोजनाओं पर काम करने के लिए कहा। उन्होंने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को अपने मिशन क्षेत्रों जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, कोयला गैसीकरण, फ्लाई ऐश प्रौद्योगिकी, दूरसंचार के लिए उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म, निगरानी, सुदूर संवेदी (रिमोट सेंसिंग) एवं आपदा की भरपाई,

और ड्रोन प्रौद्योगिकी और कृषि और औषधि (फार्मास्युटिकल) रसायन जैसे क्षेत्रों में हितधारकों की उपयुक्त पहचान करने के लिए कहा। उन्होंने वृद्धिकारक निर्माण (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग), वस्त्रों (फैब) के लिए रसायन और विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलिसिस) के लिए उच्च तापमान वाली भाप (स्टीम) जैसे उभरते क्षेत्रों का पता लगाने के लिए भी कहा।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया ने देखा है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु संकट की चुनौतियों से लड़ने के लिए हरित प्रौद्योगिकी का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि राष्‍ट्र के नाम अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भी श्री मोदी ने यह रेखांकित किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी अगले 25 वर्षों में जब भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे तब भी एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। उन्होंने आगे कहा कि सभी तकनीकी नवाचारों का अंतिम उद्देश्य आम आदमी के लिए “जीवन को आसान बनाना” है। 
कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड-19 ने हमें कम समय के भीतर सर्वश्रेष्ठ स्वदेशी तकनीकी अनुप्रयोगों के साथ आगे आना सिखाया है,

चाहे वह वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसन्धान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा वेंटिलेटर का निर्माण हो अथवा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा वैक्सीनों का उत्पादन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो-आईएसआरओ) द्वारा तरल ऑक्सीजन या परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा पुन: प्रयोज्य पीपीई किट का निर्माण किया जाना हो। उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्षों के लिए कार्य योजना ( रोडमैप) का निर्धारण भी जीवन के सभी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचारों द्वारा ही किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को उनके सुझावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया का आश्वासन दिया जैसे कि पुराने शोध को हटाने के लिए सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं (लैब्स) का समीक्षात्मक लेखा परीक्षण (ऑडिट), अनुसंधान एवं विकास के लिए निवेश का प्रवाह और बहु-संस्थागत सहयोग के माध्यम से अत्याधुनिक अनुसंधान में सरकार द्वारा सहायता दिया जाना इत्यादि।

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