असम की सरकार ने ओरंग नेशनल पार्क से हटाया राजीव गांधी का नाम, कांग्रेस बोली- योगदान नहीं मिटा सकते

असम की हिमंत बिस्वा शर्मा सरकार ने बुधवार को ओरंग नेशनल पार्क से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने का फैसला किया है। बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में इसको लेकर फैसला लिया गया, जिसके बाद अब इसे ओरांग नेशनल पार्क के नाम से जाना जाएगा। नाम हटाने के फैसले के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आदिवासियों और चाय जनजाति समुदायों की मांगों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री सरमा ने आगे कहा की ”आदिवासियों और चाय जनजाति समुदायों की मांगों को ध्यान में रखते हुए राजीव गांधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर ओरंग राष्ट्रीय उद्यान किया जाएगा।” वहीं संसदीय मंत्री पीयूष हजारिका ने बताया की हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और आदिवासी और चाय-जनजाति समुदाय के प्रमुख सदस्यों के बीच बातचीत के दौरान उन्होंने ओरंग नेशनल पार्क से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने की मांग की थी।

उन्होंने कहा की, चूंकि ओरंग नाम आदिवासी और चाय-जनजाति समुदाय की भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए कैबिनेट ने राजीव गांधी ओरंग नेशनल पार्क का नाम बदलकर ओरंग नेशनल पार्क करने का फैसला किया है। इस बीच कांग्रेस ने इसका तीखा विरोध करके कहा है कि मोदी सरकार ये सब बदले की भावना से कर रही है। वह राजीव का देश के प्रति जो योगदान है, सरकार उसे नजरंदाज करने में लगी है।

नेशनल पार्क का नाम बदले जाने को लेकर कांग्रेस ने कहा कि यह बीजेपी द्वारा देश और राज्य के लिए राजीव गांधी के योगदान को मिटाने का एक और प्रयास है। असम में कांग्रेस की मीडिया प्रभारी बोबीता शर्मा ने कहा कि वे नाम बदल सकते हैं, लेकिन आधुनिक और प्रगतिशील भारत के निर्माता के रूप में राजीव गांधी के योगदान को मिटा नहीं सकते।

वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मौजूदा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार आएगी तो बीजेपी सरकार के इस फैसले को रद्द करके फिर से ओरंग राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा जाएगा। उन्होने कहा, ”जब असम में कांग्रेस की सरकार बनेगी, तो पहले ही दिन हम इस पार्क का नाम पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखेंगे। भारतीय संस्कृति हमें आरएसएस के विपरीत शहीदों का सम्मान करना सिखाती है।”

बता दें कि ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर स्थित ओरंग राष्ट्रीय उद्यान 78.80 वर्ग किमी में फैला राज्य का सबसे पुराना वन अभ्यारण्य है। 1985 में इसे वन्यजीव अभयारण्य का नाम दिया गया और 1999 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। अगस्त 2005 में, तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने स्थानीय समूहों के विरोध के बावजूद ओरंग राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलने का फैसला किया था।

राष्ट्रीय उद्यान का नाम उरांव लोगों के नाम पर रखा गया है, जो झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। उनमें से हजारों उन राज्यों की कई जनजातियों का हिस्सा थे जिन्हें अंग्रेजों द्वारा असम के चाय बागानों में काम करने के लिए लाया गया था। उरांव जनजाति के बहुत से लोग उस क्षेत्र के पास में बसे थे जहां अब पार्क स्थित है। जिसके बाद इस पार्क का नाम ओरंग पड़ा था। 2011 की जनगणना के अनुसार, असम में 73,437 उरांव लोग हैं।

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