अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा, बालों के सफेद होने की एक वजह तनाव भी है

हम सभी को अपने शरीर के हर एक अंग से बेहद लगाव होता है फिर चाहे वह आंख, कान या नाक हो। लेकिन लड़कियों को इन सब से ज्यादा प्यार अपने बालो से होता है अमूमन देखा जाता है की महिलाएं अपने बालो को खूबसूरत दिखाने के लिए कई तरह के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती है। उन्हे अपने बालों से इस कदर लगाव होता है की वह अपनी आधी कमाई लगभग बालो में ही खर्च कर देती है मगर आज कल के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम मे से बहुत कम लोग ही अपने बालों का सही रूप से ख्याल रख पाते है।

भागदौड़ भरी इस जिंदगी में ना हम अपने खानपान का ध्यान रख पाते है और ना ही बालों का, ऐसे में आपने भी आजमाया होगा की हमारे बाल बेजान होने लगते है वह मूल रूप से अपना रंग छोड़ना शुरू कर देते है क्या आपने कभी सोचा है इसकी वजह क्या है?? इसी का पता लगाने के लिए अमेरिका में वैज्ञानिकों ने एक शोध किया जिसमे उन्होंने दावा किया है की बालों के सफेद होने का एक कारण तनाव भी है वैज्ञानिकों के अनुसार अगर हम तनाव लेना छोड़ देते हैं तो सफेद हुए बाल वापस काले हो सकते हैं।

रिसर्च करने वाले कोलम्बिया यूनिवर्सिटी इरविंग मेडिकल सेंटर (Columbia University Irving Medical Center) ने दावा किया है, पहली बार यह साबित हुआ है इंसानों में तनाव के कारण भी बाल सफेद होते हैं शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च के लिए 14 लोगों के हेयर सैम्पल लिए। इनमें 4 महिला और 7 पुरुष शामिल थे। इनकी औसतन उम्र 35 साल थी। इनके बालों की गहराई से तस्वीर से लेकर जांच की गई। जांच के दौरान यह जानने की कोशिश की गई कि इनमें बालों को रंग देने वाला पिंगमेंट कितना कम हुआ है।

रिसर्च में शामिल लोगों से तनाव के बारे में सवाल-जवाब किए गए। रोज लिखी जाने वाली डायरी से समझा गया कि कौन शख्स अधिक तनाव में रहा और किसने कम तनाव लिया। जांच करने पर तनाव और सफेद होते बालों के बीच कनेक्शन मिला। शोधकर्ताओ के अनुसार, “शरीर में मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिकाओं का पावर हाउस कहा जाता है। तनाव लेने पर इनमें बदलाव होता है और बालों से जुड़े सैकड़ों प्रोटीन भी बदलने लगते हैं। नतीजा, बाल सफेद हो जाते हैं।

उम्र के साथ इसलिए सफेद हो जाते हैं बाल बालों के अंतिम सिरे को हेयर फॉलिकल कहते हैं, यह सिर की स्किन से जुड़ा होता है। जब इंसान युवा होता है तो शरीर की कोशिकाएं बालों में खास तरह के पिंगमेंट का निर्माण करती हैं। इन पिगमेंट की वजह से बाल काले रहते हैं। इस पिगमेंट को मिलेनोसायट्स कहते हैं। जैसे-जैसे इंसान बूढ़ा होता है, मिलेनोसायट्स कम हो जाते हैं। इसलिए धीरे-धीरे बालों का रंग सफेद होने लगता है।”

वैज्ञानिकों का कहना है, कुछ लोगों में तनाव कम होने पर बाल वापस काले होने शुरू हो गए। रिसर्च के मुताबिक, अगर इंसान उम्र में काफी छोटा है या बुजुर्ग है तो जरूरी नहीं है, हर मामले में स्ट्रेस खत्म होने के बाद बाल वापस काले हो जाएं। शोधकर्ता पिकार्ड ने कहा, “बालों के सफेद से काले होने के मामले देखे गए हैं। एक शख्स के सिर में 5 बाल सफेद थे। वह छुट्टी पर गया और कुछ दिनों बाद उसके बाल काले हो गए। लेकिन एक 70 साल के बुजुर्ग में ऐसा हो, यह संभव नहीं लगता।” 

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