अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा, कोरोना के शिकार हो चुके मरीजों पर बहरेपन का खतरा

अमेरिका की एक नई रिसर्च में सामने आया है की कोरोना वायरस से पीड़ित इंसान एक समय के बाद बहरा भी हो सकता है। अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने दावा किया है की कोरोना वायरस ना केवल हमारे फेफड़े को बल्कि हमारे कान के भीतरी हिस्से को भी संक्रमित कर सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अब तक 10 कोरोना मरीजों में यह समस्या देखी गई है।

डॉ. कोन्स्टेंटिना स्टैंटोविक कहती हैं, हमे यह समझ नहीं आ रहा था कि कोरोना के मरीजों में बहरेपन और टिनिटस के मामले क्यों कॉमन है। ऐसे मामले सामने आने के बाद हमने अपनी योजना में बदलाव किया और कोरोना व कान के कनेक्शन को समझने के लिए रिसर्च शुरू की। इसे समझने के लिए हमने कानों के अंदरूनी हिस्से में होने वाले संक्रमण पर रिसर्च की। इसके लिए हमने एक मॉडल भी तैयार किया। 

डॉ. ली घेरके के अनुसार, हमने कोरोना और कान का कनेक्शन समझने के लिए इंसान की स्किन से ही एक कान का मॉडल बनाया गया। इनमें वो सभी कोशिकाएं थीं जो इंसानी कान में होती हैं। इससे कई नई बातें सामने आईं। दरअसल सकता है जो इंसान को सुनने और शरीर का बैलेंस बनाने का काम करती हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कान की समस्याओं से जूझने वाले कोविड के 10 मरीजों की जांच की गई। 

इनमें 9 में टिनिटस से जूझ रहे थे। 6 को चक्कर आने की शिकायत भी थी। इसके अलावा सभी 10 मरीजों की सुनने की क्षमता भी घट गई थी। शोधकर्ताओ के मुताबिक, हमने पाया सायटोमेगेलो, मम्पस और हेपेटाइटिस समेत कई ऐसे वायरस हैं जिनका संक्रमण फैलने से इंसानों में बहरेपन के मामले सामने आते हैं। यह वायरस बहरेपन की वजह क्यों बनते हैं, यह अब तक नहीं समझा जा सका है।

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