अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा, गर्मियों में डेंगू फैलाने वाले मच्छरों से अब खतरा नहीं

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर अमेरिका वैज्ञानिकों ने बढ़ा खुलासा किया है। अमेरिकी पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की रिसर्चर एलिजाबेथ मैक्ग्रा के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के कारण देश-दुनिया में डेंगू के मामले घट सकते हैं। उनका कहना है की जब एडीज इजिप्टी मच्छर डेंगू वायरस का वाहक बन जाता है तो इसकी गर्मी सहने की क्षमता घट जाती है। यह संक्रमित करने लायक नहीं बचता।

इसके अलावा मच्छरों में इस रोग को रोकने वाला बैक्टीरिया वोलबचिया भी काफी एक्टिव हो जाता है। इसलिए ग्लोबल वार्मिंग की वजह से डेंगू के मामलों में कमी आ सकती है। रिसर्चर एलिजाबेथ ने मच्छरों पर जलवायु परिवर्तन के असर को समझने के लिए एक प्रयोग किया। डेंगू और वोल्बाचिया से संक्रमित मच्छरों को वॉयल में डालकर 42 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान वाले गर्म पानी में डुबोया। दुनिया के कई हिस्सों में भी तापमान यहां तक पहुंचता है।

प्रयोग के बाद यह देखा गया कि 42 डिग्री सेंटीग्रेट पर मच्छर कितनी देर बाद सुस्त होना शुरू होते हैं और मौत हो जाती है। रिजल्ट में सामने आया कि जो मच्छर डेंगू से संक्रमित थे वो कमजोर हुए और 3 गुना तक सुस्त हो गए। वहीं, वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छर 4 गुना अधिक आलसी हो गए। रिसर्च में साबित हुआ कि गर्म तापमान में डेंगू वायरस और वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छर कमजोर हो जाते हैं।

ये बीमारी फैलाने लायक नहीं बचते। इनकी गर्मी सहने की क्षमता घट जाती है। ये न चल पाते हैं और न ही उड़ पाते हैं।
रिसर्चर एलिजाबेथ का कहना है कि इतनी गर्मी में मच्छर में मौजूद डेंगू का वायरस रेप्लिकेट नहीं कर पाता। यानी यह वायरस भी अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाता। अगर ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ती है तो डेंगू के मामलों की संख्या घट सकती है।

बता दें डेंगू जानलेवा बीमारी है और अब तक इसका कोई कारगर इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, डेंगू का वायरस हर साल 40 करोड़ लोगों को संक्रमित करता है और 25 हजार लोगों की इससे मौत हो जाती है। WHO कहता है, पिछले 50 सालों में डेंगू के मामले 30 गुना तक बढ़े हैं। डेंगू का वायरस संक्रमण के बाद बुखार और शरीर में दर्द की वजह बनता है।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending