अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा, ब्रेस्टफीडिंग बच्चों में सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाने में सहायक

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में दावा किया है की को माताएं अपने बच्चो को स्तनपान कराती हैं उनके बच्चो मे सोचने समझने की शक्ति बाकी बच्चों के मुकाबले अधिक होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जन्म के पहले घंटे में ही मां का दूध पीने वाले बच्चों की कम उम्र में मौत का खतरा 20% तक कम हो जाता है। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने दावा किया है की मां का दूध पीने से बच्चे में डायरिया का रिस्क भी कम हो जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ब्रेस्टफीडिंग से बच्चो में आंत में संक्रमण का खतरा लगभग 64% तक घट जाता है।

6 माह और उससे अधिक समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों में खानपान से जुड़ी एलर्जी के मामले कम सामने आते हैं। साथ ही मां का दूध पीने वाले बच्चों में सांस से जुड़े संक्रमण का खतरा 72 फीसदी तक कम होता है। निमोनिया, सीजनल सर्दी जुकाम का खतरा कम रहता है। मां के दूध में कोलेस्ट्रॉल और अन्य फैट कम होते हैं। नर्व टिश्यू का बेहतर विकास होता है। ऐसे बच्चों का आईक्यू लेवल 2 से 5 प्वाइंट अधिक होता है। इसी तरह उनका हृदय बेहतर तरीके से काम करता है। 

ब्रेस्टफीडिंग के फायदे:-

• एंटीबॉडी मिलती है।

• कैलोरी बहुत बढ़ जाती है।•

डायरिया का रिस्क भी कम हो जाता है।

• कम उम्र में मौत का खतरा 20% तक कम हो जाता है।

• दूध में ओमेगा एसिड बढ़ जाता है। इससे बच्चे का दिमाग तेजी से विकसित होता है।

• कैलोरी और ओमेगा एसिड का लेवल ज्यादा होता है, जो मांसपेशियों और दिमाग के विकास में सहायता करते हैं।

• निमोनिया, सीजनल सर्दी जुकाम का खतरा कम रहता है।

• मां के दूध में कोलेस्ट्रॉल और अन्य फैट कम होते हैं। नर्व टिश्यू का बेहतर विकास होता है।

• बच्चों का आईक्यू लेवल 2 से 5 प्वाइंट अधिक होता है। इसी तरह उनका हृदय बेहतर तरीके से काम करता है। 

स्तनपान कराने से एक मां को मिलने वाले फायदे

ना केवल बच्चो का बल्कि माताओं को भी स्तनपान कराने से हृदय रोग का खतरा 10% तक कम होता है। इसी तरह ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 28% और आर्थराइटिस का रिस्क 50% तक कम होता है। रिसर्च करने वाली यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजलिस के वैज्ञानिकों का कहना है, सिर्फ बच्चे पर ही नहीं, बढ़ती उम्र में मां के दिमाग पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। 

शोधकर्ताओं का कहना है, जो माएं कभी ब्रेस्टफीड नहीं कराती उनके मुकाबले ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं के बच्चों में सोचने-समझने की क्षमता ज्यादा बेहतर हो सकती है। शोधकर्ता मॉली फॉक्स कहती हैं, पहले हुईं कई स्टडीज में कहा गया था कि मां का दूध बच्चे को लम्बे समय तक सेहतमंद बनाए रखता है, लेकिन हमारी स्टडी यह भी बताती है कि इससे मां की सेहत पर क्या असर पड़ता है। 

रिसर्च कहती है, जो महिलाएं ब्रेस्टफीड कराती हैं उनमें उम्र के 50वें पड़ाव पर भी उनका दिमाग ब्रेस्टफीड न कराने वाली महिलाओं के मुकाबले ज्यादा बेहतर काम करता है। मॉली कहती हैं, रिसर्च के नतीजे इसलिए अलर्ट करने वाले हैं क्योंकि उम्र के 50वें पड़ाव पर सोचने-समझने की क्षमता घटती है। अल्माइमर्स और डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है। अमेरिका में दो तिहाई महिलाएं इससे जूझ रही हैं।

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