कृषि वैज्ञानिकों ने जीरे की सीजेडसी-94 नाम की नई किस्म तैयार की

राजस्थान के जोधपुर में स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने सीजेडसी-94 नाम की नई किस्म तैयार की है। ये किस्म आम बीमारियों और कीट से सुरक्षित है। सबसे अच्छी बात है कि यह किस्म 40 दिनों के बाद फूल देने लगती है और 90 से 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार भी जाती है। इस प्रजाति को विकसित करने में कृषि वैज्ञानिकों को कुल 3 साल का वक्त लगा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सीजेडसी-94 माहू कीट से सुरक्षित है। नई किस्म में फरवरी से अंत तक फल लगना शुरू हो जाता है इसलिए माहू कीट लगने की समस्या नहीं आती। बता दें की हमारे देश में जीरा मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में उगाया जाता है। गुजरात के ही ऊंझा में इसकी सबसे बड़ी मंडी है। अपने देश के ज्यादातर किसान अभी जीरे की पुरानी किस्म जीसी-4 की खेती करते आ रहे हैं।

इसमें बुवाई के 70 दिनों के बाद फूल आते हैं और पकने में 130 से 140 दिन का समय लगता है। साथ ही इस किस्म में रोग और कीट लगने का भी खतरा बना रहता है। दुनिया का करीब 70 फीसदी जीरा अकेले भारत में पैदा होता है। कुल उत्पादन का 99 प्रतिशत से अधिक राजस्थान और गुजरात में है। जिसकी कुल पैदावार में राजस्थान का हिस्सा 55.95 प्रतिशत है और गुजरात का 43.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस तरह बाकी सभी राज्यों को मिलाकर सिर्फ 0.8 फीसदी ही जीरे का उत्पादन होता है।

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