आखिर क्यों महाकाली ने भगवान शिव की छाती पर रखा था अपना पैर, जानिए वजह

आपने अक्सर बड़े बुजुर्गो के मुंह से यह कहते हुए सुना होगा कि मां काली ने शिव की छाती में पैर रखा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां दुर्गा ने महाकाली का रूप राक्षसों और दैत्य का अंत करने के लिए लिया था और मां पार्वती ही काली के रूप में प्रकट हुई थी। मगर आप जानते है की आखिर क्यों मां पार्वती को महाकाली का रूप रखने की जरूरत पड़ी होगी। आइए हम आपको बताते है दुर्गा से काली बनने की कहानी ।

क्यों लिया महाकाली का रूप
रक्तबीज नाम के एक राक्षस ने भगवान शिव को प्रसन्न कर और उनसे एक वरदान हासिल कर लिया था रक्तबीज को यह वरदान मिला था कि उसका खून जहां भी गिरेगा, वहां से उसी के समान राक्षस पैदा हो जाएगा। रक्तबीज को अपने इस गुण पर बहुत अभिमान था, इसलिए उसने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। घमंड में चूर रक्तबीज ने देवताओं को युद्ध के लिए ललकारा। घबरा कर सभी देवता मां दुर्गा के पास पहुंचे जहां मां दुर्गा ने रक्तबीज के वध के लिए महाकाली का रूप धारण किया।
माता का यह रूप इतना शक्तिशाली और डरावना था कि स्वयं काल भी भय खाता था। उनका क्रोध इतना विकराल रूप ले लेता था कि कोई भी शक्ति उनके क्रोध की शांत नहीं कर सकती थी। उनके इसी क्रोध को रोकने के लिए स्वयं उनके भगवान शंकर उनके चरणों में आ कर लेट गए थे।

शिव की छाती पर कैसे रखा पैर
रक्तबीज को समाप्त करते हुए मां इतनी क्रोधित हो गईं कि उनको शांत करना मुश्किल हो गया। काली मां का यह रूप विनाशकारी हो सकता था, इसलिए सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और बोले कि आप ही मां का क्रोध शांत कर सकते हैं। मां काली के क्रोध को शांत करना भगवान शिव के लिए भी आसान नहीं था, इसलिए भगवान शिव काली मां के मार्ग में लेट गए।
क्रोधित मां काली ने जैसे ही भगवान शिव के ऊपर पांव रखा वो झिझक कर ठहर गईं और उनका गुस्सा शांत हो गया। इस तरह भगवान शिव स्वयं ही महाकाली के गुस्से की शांति के लिए उनके मार्ग पर आकर लेट गए थे।

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