लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी की फिसली जुबान, बंगाल की मातंगिनी हाजरा को बताया असम का, टीएमसी ने किया विरोध

रविवार को 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बंगाल की स्वतंत्रता सेनानी मातंगिनी हाजरा असम का स्वतंत्रता सेनानी कहकर संबोधित कर दिया जिसके बाद से बंगाल में विवाद खड़ा हो गया है। टीएमसी के राज्य सचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए मांग की है कि प्रधानमंत्री इस तरह की टिप्पणी के लिए माफी मांगें।

दरअसल, पीएम मोदी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई सहित कई महिला योद्धाओं के योगदान को याद कर रहे थे इस दौरान उन्होंस पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर के तमलुक की मातंगिनी हाजरा का भी नाम लिया, लेकिन प्रधानमंत्री ने उन्हें बंगाल की स्वतंत्रता सेनानी कहने के बजाय असम की स्वतंत्रता सेनानी करार दे दिया।

बता दें कि मातंगिनी हाजरा का जन्म मिदनापुर जिले के होगला ग्राम में एक अत्यन्त निर्धन परिवार में हुआ था। साल 1942 में जब ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ ने जोर पकड़ा, तो मातंगिनी भी उसमें कूद पड़ीं। आठ सितंबर को तामलुक में हुए एक प्रदर्शन में पुलिस की गोली से तीन स्वाधीनता सेनानी मारे गये। लोगों ने इसके विरोध में 29 सितंबर को और भी बड़ी रैली निकालने का निश्चय किया।

इसके लिये मातंगिनी ने गांव-गांव में घूमकर रैली के लिए 5,000 लोगों को तैयार किया। सब दोपहर में सरकारी डाक बंगले पर पहुंच गये। तभी पुलिस की बंदूकें गरज उठीं। मातंगिनी एक चबूतरे पर खड़ी होकर नारे लगवा रही थीं। एक गोली उनके बायें हाथ में लगी। उन्होंने तिरंगे झंडे को गिरने से पहले ही दूसरे हाथ में ले लिया।

तभी दूसरी गोली उनके दाहिने हाथ में और तीसरी उनके माथे पर लगी। मातंगिनी की मृत देह वहीं लुढ़क गयी। इस बलिदान से पूरे क्षेत्र में इतना जोश उमड़ा कि दस दिन के अंदर ही लोगों ने अंग्रेजों को खदेड़कर वहां स्वाधीन सरकार स्थापित कर दी, जिसने 21 महीने तक काम किया।

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