भारत का एक ऐसा मंदिर जहां गैर हिन्दू भी करते है इबादत

दशकों साल पहले ‘हिन्दू मुस्लिम भाई भाई’ के नारे दिए जाते थे। एकता, अखंडता की मिशालें पेश की दी जाती थी। सन 1947 में आज़ादी के उस दौर ने ना सिर्फ अंग्रेज़ो को उखाड़ फेंका बल्कि आज़ादी की उस लौ ने हमारी एकता, अखंडता, भाईचारे, प्यार, और अपनेपन को भी जलाकर खाक कर दिया। कुर्सी के भूखे नेताओं में धर्म की ऐसी आग लगाई जो पाकिस्तान बनने के बाद भी आज तक नहीं बुझ सकी। कुछ जिन्ना की भूख तो कुछ गांधी का दोष था जिसने भारत के दो हिस्से कर डाले। वहीं अगर वर्तमान समय की बात करें तो आज भी हर जगह धर्म और मज़हब के नाम पर लोग एक दूसरे के खून के प्यासे बन हुए हैं। 1947 की वो चिंगारी आजतक नहीं बुझ सकी जो नेताओं ने अपने स्वार्थ में अंधे होकर लगाई थी। मगर क्या आप जानते हैं इन झगड़ों आदि के बीच हमारे देश में एक स्थान है जहां हिंदू-मुसलमान साथ मिलकर पूजा करते हैं। जी हां, आपको भी यह जानकार हैरानी हुई होगी। मगर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिल में स्थित सरया, इस अद्भुत दृश्य का साक्षी है। 

दरअसल बताया जाता है इस गांव में भगवान भोलेनाथ का एक मंदिर है, जहां लगभग 100 साल पुराना है शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग की सबसे खास बात तो ये है कि यहां इसकी पूजा न केवल हिंदू बल्कि मुस्लिम लोग भी करते हैं। 

इसलिए मुस्लिम करते हैं शिवलिंग की पूजा
मुस्लिमों द्वारा इस शिवलिंग की पूजा करने का कारण, इस शिवलिंग के ऊपर उर्दू भाषा में एक कलमा ‘लाइलाहाइल्लललाह मोहम्मदमदुर्र रसुलुल्लाह’ है, जिसे इस्लाम का पवित्र वाक्य माना जाता है। कहा जाता है कि इसी कलमे की वजह से इस मंदिर में खासतौर पर रमजान के पाक माह के दौरान मुस्लिम समाज के लोग अपने अल्लाह की इबादत करने के लिए जाते हैं।

किसने खुदवाया शिवलिंग पर कलमा
ऐसा कहा जाता है की जिस समय महमूद गजनवी भारत पर आक्रमण करके भारत के मंदिरों को लूट रहा था तब उसको इस मंदिर का पता चला। उसने यहां पहुंच कर मंदिर को तहस-नहस कर दिया और शिवलिंग को भी उखाड़ने का प्रयास किया परंतु गजनवी की पूरी सेना इस शिवलिंग को उखाड़ने में नाकाम साबित हुई। उसकी सेना जितनी गहराई में खुदाई करती, शिवलिंग उतना ही बढ़ता जाता था। लोक मान्यताओं हैं कि शिवलिंग को उखाड़ने में नाकाम साबित होने पर गजनवी ने इस शिवलिंग पर कलमा खुदवा दिया। महमूद गजनवी के द्वारा इस अद्भुत शिवलिंग पर कलमा खुदवाने का एक मात्र उद्देश्य यह था कि हिंदू समुदाय के लोग इस शिवलिंग की पूजा न कर सकें, परंतु आज के समय में यह शिवलिंग सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन चुका है। जहां न केवल हिंदू बल्कि मुस्लिम भी आते हैं। एक तरफ़ हिंदू पूजा करते हैं तो वहीं दूसरो ओर इस शिवलिंग के समक्ष मुस्लिम इबादत करते हैं। 
बता दें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर एक क़स्बा स्थित है खजनी, जिसके पास सरया तिवारी नामक एक गांव है, जहां भोलेनाथ का यह मंदिर स्थित है। जहां लोक मान्यता है कि इस मंदिर में हिंदू मुस्लिम दोनों धर्म के लोग मिलकर श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं।

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