वैज्ञानिकों का दावा.. एस्प्रिन दवा, कोलोन और प्रोस्टेट समेत 18 तरह के कैंसर को रोकने में सहायक

ब्रिटेन की कार्डिफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया दावा कहा, एस्प्रिन जैसी पेनकिलर कोलोन और प्रोस्टेट जैसे कैंसर से मौत का खतरा 20 फीसदी तक घटा सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कैंसर बढ़ने पर यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से फैलने लगता है। एस्प्रिन कैंसर को पूरे शरीर फैलने से रोकती है। यही कारण है कि कैंसर के इलाज में एस्प्रिन एक कारगर दवा के तौर पर जानी जाती है।

पिछले 50 सालों से एस्प्रिन के असर पर रिसर्च करने वाले प्रोफेसर पीटर एल्वुड का कहना है, यह दवा कैंसर रोगियों में मौत के खतरे को कम करती है और कैंसर फैलने से भी रोकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस रिसर्च से पहले 118 तरह के अध्ययनों को भी पढ़ा गया है। जिसमे 2,50,000 मरीजों पर हुई रिसर्च में सामने आया कि ये 18 तरह के कैंसर से होने वाली मौत का खतरा कम कर सकती है।

2015 में लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर ने 14 हजार कैंसर रोगियों पर रिसर्च की। रिसर्च के मुताबिक, रोजाना एस्प्रिन लेने वाले 75 फीसदी मरीज अगले 5 साल तक जिंदा रहे। वहीं कार्डिफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, लाखों में से एक चौथाई मरीज एस्प्रिन लेते हैं। उनके अनुसार, कैंसर का पता चलने के बाद जिन 20 फीसदी से अधिक मरीजों ने एस्प्रिन ली वो इसे न लेने वालों की तुलना में जीवित रहे।

इन 18 तरह के कैंसर में एस्प्रिन असरदार
एस्प्रिन दवा का जिन 18 तरह के कैंसर पर असर देखा गया है उनमें कोलोन, ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, नेसोफेरिंग्स, इसोफेगस, लिवर, गॉल ब्लैडर, पेन्क्रियाज, ब्लैडर, ओवरी, एंडोमेट्रियम, हेड एंड नेक, ल्यूकीमिया, ग्लिओमा, मेलानोमा, गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल और गैस्ट्रिक कैंसर शामिल है।

रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि कैंसर के मरीजों में जागरुकता होनी चाहिए कि वो डॉक्टर से एस्प्रिन लेने का सुझाव दें। हालांकी शोधकर्ताओं ने अलर्ट करते हुए कहा है कि रोजाना एस्प्रिन लेने से बचें क्योंकि यह रक्त को पतला करने का काम करती है। इसलिए कुछ मामलों में ब्लीडिंग हो सकती है।

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