लोन एप या लोन शार्क लोन एप्स की ज़्यादतियों का अगर आप शिकार हुए हैं तो हमें अपनी आपबीती लिखें। आपकी बात इस प्लेटफ़ार्म पर आने से आपकी लड़ाई को जारी रखने में मदद मिलेगी।

देश में पिछले दो साल में लोन एप्स की बाढ़ आ गई है। आसानी से लोन मिलना सुखद है। ये अर्थव्यवस्था के
लिए ज़रूरी भी है। मगर कोरोना की मार के साथ ही काम-धंधों और नौकरियों का संकट गहराया है और लोन एप्स
का कर्ज़ चुकाना बहुतों के लिए भारी हो गया। बैंकों के मुकाबले लोन एप्स से लोन आसानी से तो मिलता है मगर
न चुका पाने की स्थिति में ये बहुत से लोगों के लिए बेलगाम लोन एप्स एक बड़ी मुसीबत बन गई हैं।
ऑनलाइन लोन एप्स ने जिस तरह के आक्रामक हथकंडे अपनाए हैं उन्होंने बहुत से लोगों को मुश्किल में डाल दिया
है। यहां तक कि ये लोन लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। कल ही 24 साल के एक युवक ने पंखे से
लटक कर जान दे दी। ये घटना तेलंगाना के राजन्ना-सिरसिला ज़िले की है और युवक का नाम पवन कल्याण रेड्डी
है। पुलिस ज़िला अधीक्षक राहुल हेगड़े बी.के. के मताबिक युवक गालिपल्ली गांव का रहने वाला था और उसने चंद
हज़ार रुपयों का ऑनलाइन एप से लोन लिया था। मगर उन पैसों को वो चुका नहीं पा रहा था। ये पहली घटना नहीं
है, जहां लोन न चुका पाने की वजह से होने वाली आक्रामक उगाही ने लोगों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर
दिया। कहीं-कहीं तो परिवार के कई सदस्यों ने एक साथ आत्महत्या का अफ़सोसनाक रास्ता चुना लिया।
अकेले तेलंगाना में ही 50 से ज़्यादा केस लोन एप्स के खिलाफ़ हैरास्मेटं की शिकायतों पर रजिस्टर किए गए हैं।
तेलांगाना पुलिस 21 करोड़ के ऑनलाइन लोन एप्स के घोटाने की जांच में भी जुटी है। पुलिस की इन लोन एप्स
को ऑनलाइन स्टोर से हटाए जाने की मांग के बावजूद अब भी इनमें से ज़्यादातर एप्स औनलाइन स्टोर पर मौजूद
हैं। लोन एप्स के कारोबार का फैलाव हैदराबाद, गुरुग्राम, पुणे, बंगलौर और चेन्नई में पाया गया है। इन लोन एप्स
के विदेशी कंपनियों के साथ लिंक की जांच जारी है। पिछले साल के अंत से लेकर अब तक कई जगहों पर पुलिस
ने ऑनलाइन एप्स के दफ्तरों पर छापे मारे हैं और फ़्रॉड की जानकारी हासिल की है।
नगद की छोटी ज़रूरत पूरी करने के लिए करीब 300 करोड़ के, 5 से 50 हज़ार रुपए के छोटे लोन, इन एप्स के
ज़रिए लोगों ने लिए हैं। ये ज़रूरत उन लोगों की है जो आमदनी के लिहाज़ से निम्न-मध्यम वर्ग के दायरे में आते
हैं। इनमें से ज्यादातर वो लोग हैं जिनके लिए बैंकों से लोन लेना मुश्किल रहा होगा। यही वजह है कि 60 से 100
पर्सेंट की सालाना दरों के बावजूद ये लोन लिए गए।
RBI पिछले साल से ही ऐसी डिजिटल लोन की संस्थाओं पर नज़र रख रही है। RBI ने कहा भी है कि बैंक और गैर- बैंकिग संस्थाएं, चाहे वो अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म से लोन दे रही हैं या किसी बाहरी एजंसी के ज़रिए उन्हें फ़ेयर प्रैक्टिस या न्याय संगत तरीकों की गाइडलाइन्स का पालन करना होगा। ये पालन, शब्द और मंशा – दोनों स्तर पर किया जाना चाहिए। ये बयान RBI की सही मंशा तो दर्शाता है, मगर सिर्फ़ कह देने भर से ये खत्म होने वाली समस्या नहीं है। कम से कम उन लोगों के लिए तो नहीं जो इन लोन एप्स के चंगुल में फंस गए हैं या फंसने वाले हैं।

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Hands giving & receiving money – United States Dol


लोन न चुका पाने के पीछे, मंशा जानबूझ कर लोन न चुकाने की नहीं है, बल्कि ये स्थिति बड़े पैमाने पर इसलिए
पैदा हो रही है क्योंकि कोरोना के लॉकडआउन और बेरोज़गारी की मार के चलते प्राईवेट नौकरियों और छोटे
बिज़नस में लगे लोगों की वित्तीय स्थिति खराब हुई है।
सवाल ये नहीं है कि जिन्होंने लोन लिया है उन्हें चुकाना चाहिए या नहीं। मगर सवाल इस बात का है कि इस मंदी
और बेरोज़गारी के दौर में जिस बड़े स्तर पर आजीविकाएं प्रभावित हुई हैं और लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हुई
है, उससे बहुत से लोग लोन चुका पाने में अक्षम हो गए हैं।
जब बैंक या दूसरी वित्तीय संस्थाएं लोन देती हैं तो उन्हें वापस लेने के लिए वो आर.बी.आई. की गाइडलाइन्स के
मुताबिक ही काम करती हैं। मगर ज़्यादातर डिजिटल लोन एप्स की कंपनियां अपना कारोबार एन.बी.एफ.सी. के
तौर पर खुद को रजिस्टर किए बिना ही कारोबार कर रही हैं। इस तरह से वो नियमों से खुद को परे रखती हैं जो
ग्राहक के अधिकारों को और इन लोन एप्स की कंपनियों के संचालन को रेग्युलेट करते हैं। रेग्युलेटर से बचने के
लिए ये कंपनियां छोटे ऋण देती हैं और लोगों की शिकायत तब तक कहीं नहीं पहुंच पाती जब तक उसे किसी
अपराध की श्रेणी में न रखा जा सके। ये लोगों के लिए मुश्किल है, कि एक तरफ़ तो वो आर्थिक परेशानियों से
जूझ रहे हैं जिसपर उनका कोई कंट्रोल नहीं है और दूसरी तरफ़ लोन एप्स के, ठेके पर उगाही के लिए लगाए गए
लोगों के लगातार कॉल और मैसेजिस से भी उन्हें जूझना पड़ता है। जब ये बात धमकी या सरेआम बेइज़्जती करने
जैसे हथकंडों तक पहुंच जाती है तो एकमात्र रास्ता अदालत का ही बचता है जो और भी खर्चीला और मुश्किल से
भरा है। इस स्थिति में एक तरफ़ अकेला आदमी है और दूसरी तरफ़ एक संस्था जो चालाक, सधे हुए और
आक्रामक तरीके से लोन की उगाही के लिए पीछे पड़ जाती है।
किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति को लगातार आसान लोन के लिए फ़ोन के मैसेज और सोशल मीडिया के एड के ज़रिए
लुभाना आसान है। मगर चुकाने में देर होने पर, उनके कोई अधिकार ही नहीं हों और उन्हें धमकियों और प्रताड़ना
का सामना करना पड़े, ये स्थिति ठीक नहीं है। अब तक सरकार इनके खिलाफ़ प्रभावी कार्यवाही नहीं कर पाई है
जिसकी सख्त ज़रूरत है।
ट्विटर पर कई ग्रुप बने हैं जो लोन एप्स की आक्रामकता का शिकार हो चुके लोगों की परेशानियों को ज़ाहिर करते
हैं। मगर ये ग्रुप अपने स्तर पर जुट हो कर ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते। ये मुश्किल तब तक हल होने वाली नहीं
है जब तक सरकार और वित्तीय रेग्युलेटर इसे प्रभावी ढ़ंग से रेग्युलेट नहीं करते हैं।
लोन एप्स का लोन शार्क बनना खतरनाक है। लोन की उगाही के लिए सड़क पर घेर लेना या फ़ोन के कॉंटैक्ट्स्
हासिल कर लोन लेने वाले के परिवार और दोस्तों के सामने उन्हें बेइज़्जत करने जैसे आरोप सोशल मीडिया में
आम मिल जाएगें।
ये किसी एक संस्था या डिजीटल एप की बात नहीं है। ये डिजिटल रेव्यूल्यून की वजह से तेज़ी से बदलते हुए
परिदृष्य पर लगातार नज़र रख कर उसके फ़ायदों और नुकसान के मुताबित जल्द एक्शन लेने की सरकार और
रेग्युलेटरों की क्षमता की बात है। हमारी वित्तीय नियामक संस्थाओं को तत्परता दिखानी होगी और ढ़ीला-ढ़ाला रवैया छोड़ना होगा। लोन एप्स एक सहूलियत के बजाए और ज़्यादा लोगों के लिए मुश्किल न बन जाएं इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और RBI, NBFC समेत सभी संस्थाओं को जल्द इसका समाधान निकालना होगा। ये सिर्फ़ पुलिस के बूते की बात नहीं है जहां वो अपराध घटने के बाद पहुंच कर अपराधी की तलाश करें। लोन एप्स की
वित्तीय व्यवस्था और फंडिग के स्रोतों के लिए असरदार नियम और चैक बैलेंस बनाए जाने बेहद ज़रूरी हैं।
बैंकों के अलावा गैर-वित्तीय संस्थाएं अर्थव्यवस्था को माइक्रों स्तर पर बहुत फ़ायदा पहुंचा सकती हैं मगर बिना
असरदार मानकों के यही बहुत ज़्यादा नुक्सान भी कर सकती हैं। यही वक्त है कि लोन एप्स को रेग्युलेट किया
जाए और लोन एप्स को लोन शार्क बनने से रोका जाए वर्ना और ज़िंदगियां इनकी भेंट चढ़ जाएंगी।

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