पूर्वोत्तर राज्यों के सांसदों ने Pm Modi से की मुलाकात, असम-मिजोरम सीमा विवाद पर हुई चर्चा

पूर्वोत्तर राज्यों के सांसदों ने सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर असम-मिजोरम सीमा विवाद एक संयुक्त बयान जारी किया। जिसमे साफ कहा गया है कि इस मामले को तूल देने वालों के इरादे सफल नहीं होने दिए जाएंगे। साथ ही कांग्रेस के रवैये पर भी सांसदों ने सवाल उठाए हैं। बयान में कहा गया है कि कांग्रेस की सरकारें लगातार पूर्वोत्तर के राज्यों में बनती रहीं, लेकिन उसने कभी भी मसलों को हल करने के बारे में नहीं सोचा।
जारी बयान में कहा गया है कि असम और मिजोरम के सीएम ने बातचीत से मसले को हल करने की बात कही है, लेकिन इस मामले में कांग्रेस का रवैया शातिराना है। बयान में कहा गया है कि ऐसे सभी तत्व, जो मौके का फायदा उठाकर भारत को अस्थिर करना चाहते हैं उन्हें सफल नहीं होने दिया जाएगा।
बयान में जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि दोनों ने मिजो और नगा लोगों की इच्छाओं के बारे में कभी नहीं सोचा। सांसदों ने कहा है कि कांग्रेस मिजोरम में शांति स्थापना के लिए समझौता कराने का दावा करती है, लेकिन तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने महज दो साल में लालडेंगा की सरकार को गिरा दिया। ताकि मिजोरम में कांग्रेस की सरकार बन सके।
सांसदों ने कहा है कि कांग्रेस ने अगर चीन के बारे में सख्त रुख अपनाया होता, तो आज अरुणाचल के निवासी शांति से रह सकते थे। बयान में आरोप लगाया गया है कि असम में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने 1970 और 1980 के दशक में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश लगातार जारी रखी। बयान में आरोप लगाया गया है कि काग्रेस की सरकारों ने पूर्वोत्तर के लोगों को उनके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया था और शहरों तक में विकास के काम नहीं हुए थे।
सांसदों ने बयान के आखिर में फिर साफ कर दिया कि कांग्रेस की बंटवारे की नीति को पूर्वोत्तर में सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस विवाद को राजनीतिक रंग देना चाहती है और पूर्वोत्तर के मसलों को संसद में उठाने से रोकने के लिए रोज हंगामा करवा रही है।

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