धार्मिक और आध्यात्मिक वजहों से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है हरिद्वार

एक धार्मिक नगर है. हरिद्वार उत्तराखण्ड राज्य में स्थित एक विश्वविख्यात शहर हैं जो हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है. हरिद्वार का कुल छेत्रफल 2360 किलोमीटर तथा समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 249.7 मीटर यानि 819.2 फीट है. हरिद्वार जिले की स्थापना 28 दिसंबर 1988 को हुई है. इसके बाद 9 नवंबर 2000 को हरिद्वार नवगठित उत्तराखण्ड राज्य का हिस्सा बन गया. साल 2011 के जनगणना के अनुसार, हरिद्वार की जनसंख्या 1890422 है. इस जनसंख्या के साथ ही यह उत्तराखण्ड का सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला बन गया है.

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विश्वभर से हिंदू धर्म को मानने वाले लोग हरिद्वार आते है और यहां गंगा नदी में स्नान करने की इच्छा रखते है. इस बार हरिद्वार और भी चर्चा में है क्योकि 2021 का कुंभ मेला यहीं लगने जा रहा है. बात अगर इस शहर की करे तो इस शहर में हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ माना जाने वाले हरिद्वार में लोग गंगा नदी में स्नान करने की इच्छा रखते हैं और हर की पौड़ी पर अपना समय बिताना चाहते हैं. यहां पर आपको कई मंदिर भी देखने को मिलेंगे और इस शहर का अपना एक धार्मिक महत्व है. ऐसा कहा जाता है कि हरिद्वार के बिना उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है, क्योंकि यह शहर अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक वजहों से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. इस शहर के बार में अधिक जानकारी रखने वाले लोग कहते है कि यही कारण है कि यहां पर भारत के साथ-साथ अन्य देशों से भी श्रद्धालु घूमने आते हैं. साथ ही अगर  बात अगर साधु-संतों की करें तो देश के तमाम बड़े-बड़े हिन्दू धर्मगुरुओं के हरिद्वार में आश्रम और मठ हैं जहां इन मठों और आश्रमों में भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. इससे हरिद्वार में पर्यटकों का बढ़ावा भी मिलता है. साथ ही इससे राजस्व में वृद्धि भी होती है.

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हरिद्वार को भगवान शिव की नगरी भी कहा जाता है. साथ ही इस शहर को गंगाद्वार भी कहा जाता है. हरिद्वार में  प्रत्येक बारह वर्ष पर महाकुम्भ का आयोजन होता है और इसके साथ ही सनातन परंपरा का यह प्रमुख केंद्र भी है. इस परंपरा से जुड़े सभी अखाड़ों के आश्रम यहां पर मौजूद हैं. वहीं, इस नगर को सिद्धपीठों व शक्तिपीठों की भूमि के रूप में भी जाना जाता है. शिवालिक पर्वतमाला पर स्थित मा मनसा देवी, नील पर्वत पर विराजमान मा चंडी देवी और अंजनी माता की ख्याति के बारे में कौन नहीं जानता. वहीं, नीलेश्वर महादेव के अलावा हरिद्वार के हृदय स्थल में मा माया देवी व सुरेश्वरि देवी के मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं. साथ ही यावन्ही नील धारा तट पर स्थित मा दक्षिण काली का मंदिर को अध्यात्म का गढ़ माना जाता है.

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