कच्चे कोकिंग कोयले के उत्पादन को लेकर केंद्र द्वारा दी गई जानकारी, जानिए 2030 तक कितना हो जाएगा उत्पादन

कोयला यानी कि काला सोना। ऊर्जा उत्पादन के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है इसे किसी को बताने की जरूरत नहीं है। कोयला वैसे खनिज संसाधनों में है जो कि आज के युग में काफी जरूरी है। कोयले से बिजली का उत्पादन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है जो कि हर देश के लिए काफी जरूरी होता है।

इसी बीच केंद्र सरकार ने कोयले को लेकर अहम जानकारी दी है। केंद्र सरकार ने बताया है कि देश का घरेलू कच्चे कोकिंग कोयले का उत्पादन 2030 तक 51.7 मिलियन से 140 मिलियन तक पहुंच सकता है। गौरतलब है कि लोहा और इस्पात के उत्पादन के लिए कोकिंग कोल एक आवश्यक कच्चा माल है।

 कोयला उत्पादन को लेकर कोयला मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत कोयला मंत्रालय द्वारा किए गए परिवर्तनकारी उपायों से कोयले के उत्पादन को 2030 तक 140 मिलियन तक पहुंचाए जाने की संभावना व्यक्त की गई है। अगर बात कच्चे कोकिंग कोल के उत्पादन को और बढ़ाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए पिछले 2 वर्षों में प्रयासों की करें तो केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले 2 वर्ष के दौरान 22.5 मिलियन टन की पीक रेटेड क्षमता के साथ निजी क्षेत्रों को 10 कोकिंग कोल ब्लॉकों की नीलामी की है।

बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश ब्लॉकों में 2025 तक उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इस बात की भी संभावना कई विशेषज्ञों द्वारा जताई गई है कि कच्चे कोकिंग कोयले की आपूर्ति को और बढ़ाने के लिए इन ब्लॉकों को निजी क्षेत्र के लिए बिक्री के बाद के दौर में पेश किया जा सकता है। इसके अलावा कोल इंडिया लिमिटेड जो कि घरेलू कोयला उत्पादन में 80% की भूमिका निभाता है उसने कच्चे कोकिंग कोल उत्पादन को 26 एमटी तक बढ़ाने का फैसला लिया है। इसके साथ ही सीआईएल ने 2025 तक 20 मिलियन टन की अधिकतम रेटेड क्षमता वाली 9 नई खानों का पहचान किया है जो कि आने वाले समय में कोयला उत्पादन में अहम भूमिका निभाएंगे। 

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