आखिर कब बनेगी कृषि कानून पर बात ?

किसान आंदोलन अब 100 दिनों का हो चुका है. पर कृषि कानून को लेकर आंदोलनकारी किसानों और सरकार के बीच बात अब तक नहीं बन पाई है. किसान कृषि कानून को रद्द करने की जिद पर अड़े है तो सरकार भी अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं. ऐसे में कृषि कानून पर हल कैसे निकलेगा, वर्तमान में सबसे बड़ा सवाल यही है. सवाल ये भी क्या किसानों द्वारा किया जाने वाला चक्काजाम, रैली , जूलूस और रेल रोको अभियान ही कृषि कानून को वापस कराने का तरीका रह गया है. इससे कृषि कानून पर हल निकलेगा या नहीं पर इससे आम जनता जरूर परेशान होती है. पिछले तीन महीने से भी अधिक से चल रहे किसान आंदोलन की आड़ में रानजनीतिक पार्टियां अपनी राजनीति भी चमाकाने में लगी है. पर क्या ये सही है ?  आखिर सरकार द्वार दिए गए प्रस्तावों पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है ? बस एक की जिद पर आंदोलनकारी टिके है कि कृषि कानून को वापस करे. ऐसे में हल कैसे निकलेगा ?

  आखिर कब तक आम लोगों को इस आंदोलन के कारण परेशानियां झेलनी होंगी. सरकार ये लगातार कह रही है कि इस कानून से किसी भी किसान की जमीन या आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा पर किसान इस बात को मानने को तैयार नहीं है. एमएसपी कभी समाप्त नहीं होगी इस बात का दावा भी किया जा रहा है पर बात फिर भी किसान आंदोलन पर बन नहीं पा रही है. बात कब बनेगी ये तो पता नहीं पर किसान आंदोलन ने शतक लगा दिया है. लेकिन अभी तक कृषि कानून पर कई बार किसानों और सरकार के बीच बातचीत होने के बाद भी हालाता जस के तस है ये जरूर स्पष्ट है.  

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